डिप्लोमा इंजीनियर्स संघ, ग्रामीण अभियंत्रण विभाग की विधिक
स्थापना प्रान्तीय अधिवेशन के माध्यम से 08-09 अक्टूबर 1977 को लखनऊ में हुई। यधपि
वर्ष 1974-75 से ही विभिन्न जनपद स्तरीय शाखाओं के माध्यम से संगठन की अलख कुशल चितेरों
द्वारा जगाई जा चुकी थी। संघ के गठन के इतिहास की कडियाँ उपलब्ध जानकारी और अभिलेखों
के अनुसार निम्नवत है :-
ग्रामीण अभियंत्रण सेवा की स्थापना शासनादेश संख्या 296138-(4)90472
दिनांक 01 जुलाई 1972 को प्रदेश के ग्राम्य विकास विभाग के अन्तर्गत हुई। विभाग
में जूनियर इंजीनियर (तत्कालीन पद सहायक विकास अधिकारी) के रूप में सर्वप्रथम योगदान इं0
गोपाल कृष्ण सिन्हा ने 05 अगस्त 1972 को किया। संख्याबल कम होने तथा समान विषमताओं
को आधार मानकर ग्राम्य विकास विभाग के अन्तर्गत ही दूसरे अभियंत्रण विभाग लघु सिंचाई
के साथ संयुक्त रूप से संघ गठित किये जाने की प्रक्रिया प्रारम्भ हुई।
बक्शी का
तालाब लखनऊ में प्रशिक्षण हेतु आये लघु सिंचाई के साथियों द्वारा अराजपत्रित अल्प
सिंचाई एवं ग्रामीण अभियंत्रण कर्मचारी परिषद उ0प्र0 का गठन हुआ। पंजीकरण संख्या
807 दिनांक 26 अगस्त 1972 द्वारा यह परिषद पंजीकृत करायी गयी। इसमें दोनों विभागों
के समस्त अवर अभियंता सदस्य माने गये। इस परिषद को उत्तर प्रदेश डिप्लोमा इंजीनियर्स
महासंघ से दिनांक 16-04-1973 को सम्बद्धता भी प्रदत्त की गई। ग्रामीण अभियंत्रण सेवा
के संगठन की इकाई के प्रकाश में आने की सूचना सर्वप्रथम जनपद मुजफ्फरनगर में दिनांक
27-07-1974 को संज्ञानित होती हैं इस बैठक की अध्यक्षता स्व0 इं0 एस0के0 बंसल तथा संयोजन इं0 हरपाल सिंह ने किया। इस बैठक का स्थल जनपद में कार्यरत जूनियर इंजीनियर इं0 के0एन0
वर्मा का आवास था। इस बैठक में प्रतिमाह 3.00 रूपयें का मासिक अंशदान भी निर्धारित
किया गया। इसी क्रम में जनपद शाखा गाजीपुर के गठन की सूचना भी प्राप्त है। 05 जनवरी
1975 को जनपद इकाई का गठन हुआ जिसमें इं0 गोपाल कृष्ण सिन्हा अध्यक्ष, इं0 कैलाशपति
पाण्डेय सचिव तथा इं0 विनोद कुमार सिंह कोषाध्यक्ष चयनित हुये।
वर्ष 1975 में ही जनपद
अल्मोड़ा की शाखा का गठन किया गया जिसमें इं0 टी0पी0 सिंह अध्यक्ष तथा इं0 शिवशंकर दूबे
सचिव बने। 04 सितम्बर 1974 को उपरोक्त परिषद की बैठक जनपद सीतापुर में हुई जहा लघु
सिंचाई के इं0 महेशमणि त्रिपाठी तथा ग्रामीण अभियंत्रण सेवा के इं0 के0एन0 झा की
मुलाकात हुई। वर्ष 1975 के प्रारम्भ में परिषद के नाम से कर्मचारी परिषद हटाते हुए संगठन का नाम अवर अभियंता संघ उ0प्र0 लघु सिंचाई एवं ग्रामीण अभियंत्रण सेवा
किया
गया। जिसका प्रान्तीय अधिवेशन (द्वितीय) दिनांक 8 व 9 फरवरी 1975 को जिला परिषद हाल
लखनऊ में सम्पन्न हुआ। अधिवेशन में इं0 महेशमणि त्रिपाठी प्रान्तीय अध्यक्ष तथा इं0
के0एन0 झा सचिव (द्वितीय) के पद पर चयनित हुये। इस अधिवेशन में विभाग के पाच जू0इं0
प्रतिनिधियों ने भाग लिया। (1) इं0 के0एन0 झा (2) इं0 विजय कुमार (3) इं0 विमलेश कुमार
श्रीवास्तव (4) इं0 महेश कुमार अग्रवाल (5) इं0 कृष्णकान्त सिंह (वर्तमान में सभी
सेवानिवृत्त)। इस अधिवेशन में रखे गये प्रस्तावों के क्रमांक 04 पर लघु सिंचाई एवं
ग्रामीण अभियंत्रण सेवा को एक में संविलीन किये जाने का विरोध ग्रामीण अभियंत्रण सेवा
के प्रतिनिधियों ने किया। इस विरोध पर उपरोक्त प्रस्ताव पारित नही हो सका तथा पृथक
से विचार किये जाने का निर्णय लिया गया। अधिवेशन के अगले दिन 10-02-1975 को इस विषय
पर लखनऊ के रामाधीन इण्टर कालेज में बैठक रखी गयी। परन्तु बैठक की अध्यक्षता कर रहे
इं0 महेशमणि त्रिपाठी ने इस बिन्दू पर ग्रामीण अभियंत्रण सेवा के प्रतिनिधियों की कोई
बात नही मानी। विभाग के उक्त पाचों प्रतिनिधियों ने इस बैठक का बहिष्कार कर इसी परिसर
में अलग से अपनी बैठक की तथा पृथक से संगठन बनाने का निश्चय करते हुये अपने-अपने जनपदों
में चले गये।
इस प्रकार उपरोक्त पाचों प्रतिनिधि ग्रामीण अभियंत्रण सेवा में डिप्लोमा
इंजीनियर्स संघ के संस्थापक की श्रेणी में आते है।
इं0 महेश कुमार अग्रवाल ने लखनऊ
से वापस मेरठ पहुचने पर इस घटना की चर्चा की तथा 09 मार्च 1975 को सार्वजनिक निर्माण
विभाग के विश्राम गृह में बैठक आयोजित की जिसमें मेरठ से 6 और मुजफ्फरनगर से 5 जूनियर
इंजीनियर प्रतिनिधियों ने भाग लिया। सार्वजनिक निर्माण विभाग से इं0 महावीर शर्मा एवं
इं0 आर0के0 वर्मा अतिथि के रूप में आमंत्रित हुये। भविष्य में इं0 वर्मा सार्वजनिक
निर्माण विभाग के महामंत्री चुने गये तथा सेवानिवृर्त्ति के पश्चात विधायक भी बने। इस
बैठक में प्रखण्ड स्तरीय कमेटी का गठन हुआ। जिसमें इं0 महेश कुमार अग्रवाल अध्यक्ष
व इं0 केदार नाथ वर्मा सचिव चुने गये। इस क्रम को आगे बढाते हुये जूनियर इंजीनियर्स
एशोसिएशन ग्रामीण अभियंत्रण सेवा मेरठ मण्डल का गठन दिनांक 12-04-1975 को मेरठ में
किया गया। जिनमें निम्न पदाधिकारी चुने गये।
अध्यक्ष - इं0 शांति स्वरूप शर्मा
महामंत्री - इं0 के0एन0 वर्मा
सचिव - इं0 हाकिम अली संगठन
मंत्री - इं0 हरपाल सिंह
कोषाध्यक्ष - इं0 महेश कुमार अग्रवाल
कुछ दिनों पश्चात इं0 शांति स्वरूप शर्मा के विभाग छोड़ देने
के कारण इस मण्डल शाखा के अध्यक्ष इं0 राजकुमार त्यागी बनाये गये।
जुलाई 1977 में
इं0 कृत्यानन्द झा जी ने संघ के गठन की आवश्यकता, इसके स्वरूप और उद्देश्यों को समाहित
करते हुये एक अपील जारी की जिसमें एक तदर्थ समिति गठित किये जाने तथा समिति का नाम उत्तर प्रदेश ग्रामीण अभियंत्रण पात्रोपाधि अभियंता संघ रखे जाने जैसे प्रस्ताव थे।
इस तदर्थ समिति में इं0 कृत्यानन्द झा को संयोजक तथा इं0 प्रदीप कुमार श्रीवास्तव, इं0 राजकिशोर प्रसाद सिंह, इं0 विमलेश कुमार श्रीवास्तव व इं0 हृदेशमणि मिश्रा को
सदस्य मनोनीत किया गया। इस श्रृँखला में दिनांक 8 व 9 अक्टूबर 1977 को प्रदेश स्तरीय
प्रथम अधिवेशन लखनऊ के नाका हिण्डोला स्थित
विनायक धर्मशाला में सम्पन्न हुआ। जिसमें इं0 के0एन0 झा प्रान्तीय अध्यक्ष तथा इं0 श्यामाचरण श्रीवास्तव महासचिव पद पर चयनित
हुये। इस अधिवेशन में कुल 22 सदस्यों ने भाग लिया था।
इस प्रकार पात्रोपाधि अभियंता
संघ, ग्रामीण अभियंत्रण सेवा के नाम से संघ की स्थापना दिनांक 09 अक्टूबर 1977 को हुई।
जिसकी प्रथम कार्यकारिणी बैठक दिनांक
10 अक्टूबर 1977 को सुन्दर सदन, मोतीनगर, लखनऊ
में सम्पन्न हुई।
कालान्तर में 15 सितम्बर 1988 को इलाहाबाद मण्डल के प्रथम मण्डलीय
अधिवेशन में मुख्य अतिथि के रूप में पधारे तत्कालीन ग्राम्य विकास मंत्री मा0 श्यामसूरत
उपाध्याय जी के समक्ष संघ की मान्यता व विभाग में कार्यरत समस्त जूनियर इंजीनियर्स
सदस्यों को मोटर साइकिल भत्ता अनुमन्य करने की माँग रखी गयी। फलस्वरूप संगठन को शासनादेश
सं0 1342-38-9-89-904 (125)78 दिनांक 28 मार्च 1989 द्वारा शासकीय मान्यता प्राप्त हुई।
तथा संगठन की दूसरी माँग भी अल्प समय में प्राप्त हुई।
संघ की चतुर्थ कार्यकारिणी
में संघ का नाम पात्रोपाधि अभियंता संघ से बदलकर
डिप्लोमा इंजीनियर्स संघ, ग्रामीण
अभियंत्रण सेवा, उ0प्र0 किया गया। इस
कार्यकारिणी के अध्यक्ष इं0 एस0के0 बंसल और महासचिव इं0 शिवशंकर दूबे थे।
संघ की त्रयोदशम कार्यकारिणी के कार्यकाल में शासनादेश संख्या
966(1)20-1-ई-2011-यू0ओ0-35110 दिनांक 14-06-2011 द्वारा विभाग का नाम परिवर्तित
होकर ग्रामीण अभियंत्रण विभाग किये जाने के फलस्वरूप संगठन का नाम डिप्लोमा इंजीनियर्स संघ, ग्रामीण अभियंत्रण विभाग
स्थापित किया गया। संघ का नया प्रतीक चिन्ह (Monogram)
भी अनुमन्य किया गया। संघ के नाम में संशोधन का अनुमोदन उ0प्र0 शासन ग्रामीण अभियंत्रण
विभाग के शासनादेश संख्या 4214-92- 2011-91 एम2011 दिनांक 16-11-2011 द्वारा प्राप्त
हो चुका है। इस प्रकार संगठन का वर्तमान नाम ''डिप्लोमा इंजीनियर्स संघ, ग्रामीण अभियंत्रण
विभाग, उ0प्र0''
प्रख्यापित हो चुका है।